और विश्वास करने वालों की मण्डली एक चित्त और एक मन के थे … (प्रेरित 4:32)
हमारे बारे में
परमेश्वर हर व्यक्ति को अपने साथ मेल और संगति मे जीने के लिए बुलातें हैं। हम मसीही हैं, हममे से हरेक ने परमेश्वर के इस बुलाहट का जवाब देने का निर्णय लिया है, इसलिए हम साथ हैं और हर दिन एक‑दूसरे को परमेश्वर की इच्छा के प्रति आज्ञाकारी होने में सहायता करना चहतें हैं।
हालांकि, हम अलग-अलग पृष्ठभूमि से हैं, फिर भी हम एकता में आ पाए क्योंकि हमने आजकल के धार्मिक मंडलियों (नामधारी मसिहियों) में मानव निर्मित आचारों और रीतिवाद का खोखलापन देखा, जो मसीही जीवन और बाइबिल आधारित मसीही संगति को हमारे दिनों में बहुत सैद्धांतिक या असंभव के रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम समझ पाए कि परमेश्वर चाहतें हैं कि हम पश्चाताप करें और ऐसे पाखंड से बाहर आएं तथा पूरे हृदय से यीशु का अनुसरण करने का स्पष्ट निर्णय लें।
मैं केवल इन्हीं के लिये बिनती नहीं करता, परन्तु उन के लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्वास करेंगे, कि वे सब एक हों। जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूं, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ही ने मुझे भेजा। (यूहन्ना 17:20–21)
यीशु की इस प्रार्थना में हमने समझा कि मसिहियों के बीच एकता और प्रेम की उनकी इच्छा केवल उनके शिष्यों या आरंभ के मसिहियों के लिए ही नहीं थी, बल्कि उन सभी के लिए थी जो “उनके (अर्थात शिष्यों के) वचन के माध्यम से” उन पर विश्वास करेंगे। हम इस प्रार्थना को अवास्तविक या सैद्धांतिक नहीं मानते, बल्कि यह एकता नये नियम के समय के मसिहियों के बीच वास्तविकता थी।
हमारी कोशिश भी यही है। हम एक‑दूसरे के लिए आभारी हैं कि हम एक परिवार के सगे भाई‑बहनों की तरह हो सकतें हैं — जहां एकता और प्रेम है वहीं हमारा घर है। हमने जाना कि यीशु चाहते थें कि इस संसार के लिए मसीहों का जीवन एक चिन्ह हो ताकि संसार के लोग भी कलीसिया के ज़रिए परमेश्वर के प्रेम को देखें और पश्चाताप करें।
क्यूंकी हम देखते हैं कि बाइबल में मसिहियों की संगति एक परिवार की तरह थी, इसलिए हम अपनी संगति मे किसी भी प्रकार की पदानुक्रमिक संरचना या संगठनात्मक व्यवस्था स्वीकार नहीं करते हैं। न ही हम एक मसीही कलीसिया के नाम रखने या उसके संस्थागत आकार से सहमत हैं। यीशु चाहते हैं कि संसार एक नाम, इमारत या एक मानवीय व्यक्तित्व के अलावा कुछ और देखे।
हम एक‑दूसरे की मदद करना चाहते हैं ताकि हम यीशु की शिक्षाओं में बने रहें और अंत तक अपने विश्वास में दृढ़ रहें। भाईचारे की संगति हमारे लिए बहुत ज़रूरी है ताकि हम परमेश्वर की इच्छा के अधीन रहने के लिए एक‑दूसरे को प्रोत्साहित करें और खुद भी प्रोत्साहित हों। अकेले हम असहाय महसूस कर सकते हैं या खुद को धोखा दे सकते हैं, लेकिन अपने भाइयों की मदद से हम परमेश्वर की अगुवाई पा सकते हैं।
हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। क्योंकि हम मसीह के भागी हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। (इब्रानीयों 3:12–14)
हमारे अलग-अलग पेशे, पढ़ाई या ज़िम्मेदारियाँ हैं, हम देखते हैं कि अगर हम परमेश्वर के सामने सही प्राथमिकताएँ रखते हैं, तो हमारे दैनिक आत्मिक ज़िम्मेदारियों के साथ इन बातों को ले चलना बिलकुल संभव है। हम पढ़ाई, काम आदि जैसी सांसारिक ज़िम्मेदारियों से भागना परमेश्वर की इच्छा नहीं समझते (जैसा कि कुछ ईसाई संस्थाओं में समझा जाता है)। हम एक पवित्र राष्ट्र बनकर, संसार मे रहते हुए भी उससे बिल्कुल अलग होकर, सभी लोगों के लिए एक गवाही बनने की यीशु की आज्ञा को स्वीकार करते हैं।
हम आजकल के किसी व्यक्तित्व—“भविष्यवक्ता,” “मसीहा,” “गुरु” आदि—जैसे विलियम एम. ब्रैनहैम, एलेन जी. व्हाइट, जोसेफ स्मिथ, वॉचमैन नी, आह्न सांग‑होंग आदि—या उनके उपदेशों को स्वीकार नहीं करते, क्योंकि हम देखते हैं कि बाइबल परमेश्वर का पूर्ण प्रकाशन है। न ही हमारा यहोवा-साक्षियों के वॉच टावर सोसाइटी या लैटर डेज़ सेंट्स (मॉर्मन) से कोई लेना-देना है। वैसे ही शीनचेओन्जी या स्वर्गीय‑माता जैसे आधुनिक पंथों के समान अन्य नामधारी सभाओं से भी हमारा कोई संबंध नहीं। हम देखते हैं कि पवित्र आत्मा के द्वारा प्रत्येक मसीही ऐसे प्रमुख व्यक्तित्वों या संघटनाओं पर निर्भर हुए बिना परमेश्वर की इच्छा को समझने में सक्षम है। बाइबल को सही रीति से समझने के लिए परमेश्वर और उनके सत्य के प्रति एक ईमानदार और निष्कपट मन काफी है।
इस भरोसे के साथ हम मिलकर बाइबल का अध्ययन करते हैं और परमेश्वर के वचन के बारे में एक‑दूसरे के साथ अपनी खुशी बाँटते हैं। हम परमेश्वर के बुलावे को दूसरे लोगों तक भी पहुँचाना चाहते हैं और उन्हें परमेश्वर के लिए जीने का फैसला करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। हमें किसी भी जगहों पर अन्य मसीही भाई‑बहनों से मिलकर बहुत खुशी होगी।