“और विश्वास करने वालों की मण्डली एक चित्त और एक मन के थे…”

(प्रेरितों के काम 4:32)

हम है मसीही भाई–बहन जो यीशु मसीह के उदाहरण का अनुसरण करने, उनके वचन का पालन करने और नए नियम के मसीहियों की तरह एक‑दूसरे के साथ भाईचारे प्रेम में जीने की गहरी इच्छा रखते हैं।

हम साथ मिलकर हर दिन उनके वचन, यानि बाइबिल, की गहरी बातों के बारे मे चर्चा कर उनकी इच्छा को सम­झने का प्रयत्न करते हैं। इस वेबसाइट में प्रस्तुत लेख और विचार परमेश्वर के साथ हमारे जीवन का फल है।

लेखों की सूची देखें

अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहाँ कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं […] (मत्ती 6:19)

“मैं कहाँ जा रहा हूँ?” — क्या आपने कभी ख़ुद से यह सवाल पूछा है? क्या आपने अपने जीवन के लक्ष्य के बारे में सोचा है? क्या पैसे, सरकारी नौकरी, शादी, मनोरंजन, विदेश जाना आदि, जैसे लक्ष्यों से आपका जीवन चल रहा है? क्या आपने कभी सोचा है कि क्या जीवन का सार सिर्फ़ यही है?

संसार में हम ऐसे कई सुझावों से घिरे हैं, जो हमारे जीवन को पूर्णता प्रदान करने का वादा करते हैं। हम यह भी देख सकते है कि इन बातों से सच्ची आनंद या शांति नहीं प्रदान हो सकती हैं। क्योकि वे सभी नाशवान है और निरंतर हमारे साथ नहीं रह सकते। इस संसार के चीजें अल्पकालिक हैं और वे समाप्त हो जाएँगे।

केवल एक ही  मार्ग है जो अविनाशी है और अनंत आनंद और शांति की हमारी गहरी अभिलाषा को पूरा कर सकता है। इसलिए हमें इस संसार से परे संतुष्टि की तलाश करनी चाहिए, अर्थात् परमेश्वर की तलाश करनी चाहिए।

यीशु हमे ऐसी शान्ति के लिए पुकारते हैं:

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है। (मत्ती 11:28–30)

प्रकृति की शक्ति या उसकी अद्भुत सुंदरता के द्वारा भी परमेश्वर हमसे बात करना चाहते हैं। इनसे भी वे हमें दिखाना चाहेंगे की वे हमसे कितना प्रेम करते हैं, खास कर उन्होंने हम सभी को एक विवेक दिया है जो हमे अच्छाई की ओर रास्ता दिखाता है। परमेश्वर ने हमें इसलिए बनाया है कि वह हमें पूर्ण रूप से प्रेम कर सकें। लोग अक्सर इस प्रेम को दूसरों में खोजते हैं और निराश हो जाते हैं। हम चाहे कितने भी निःस्वार्थ क्यों न हों, एक‑दूसरे की इस गहरी आकांक्षा को पूरा नहीं कर सकते। हमारा सीमित प्रेम कभी भी वह संतुष्टि और मूल्य नहीं दे सकता, जो केवल परमेश्वर ही दे सकते हैं। केवल वही हमें पूर्ण रूप से प्रेम कर सकते हैं।

परमेश्वर के प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने अपने पुत्र यीशु को हमारे पास भेजा। यीशु संसार मे इसलिए आए ताकि अपने जीवन से हमें यह दिखा सकें कि वह हमसे कितना प्रेम करते हैं और हमें हमारे पापों से बचाना चाहते हैं। उन्होंने हमें पापों की क्षमा और उससे छुटकारा पाने का रास्ता दिखाकर अपनी दया दिखलाई।

क्या आप जीवन के असली और एकमात्र लक्ष्य की खोज कर रहे हैं? क्या आपने इस प्रेम को कभी अनुभव किया है?

हम इस प्रेम को आपके साथ भी बाँटना चाहेंगे! अगर आपके मन में इस विषय में या इस वेबसाइट पर पढ़े किसी अन्य लेख के बारे में कोई विचार या सवाल हैं, तो हमसे जरूर संपर्क करें।